जब आप कोई लैपटॉप या डेस्कटॉप खरीदना चाहते हो तो आपको उनमें हार्डडिस्क के बारे में जरूर सोचते हो। हार्डडिस्क दो प्रकार की होती हैं HDD और SSD यह दोनों एक ही काम करती है परन्तु इनमें बहुत अंतर होता है। ऐसे में कौन सी हार्डडिस्क लेनी चाहिए। इसलिए दोनों में अंतर का जानना बहुत जरूरी हैं।
आइये इनके बारे में जानते हैं :-
इसमें स्टोरेज के लिए माइक्रोचिप लगे होते हैं। जिसके कारण यह ज्यादा समय तक चलती है। इसमें मूविंग पार्ट्स नहीं होते है जिससे कम्पन नहीं होता हैं। इसमें डेटा को पढ़ने और लिखने के लिए एक Embedded Processor होता है जिसे कंट्रोलर कहा जाता है। SSD में NAND-based फ़्लैश मैमोरी का उपयोग होता है जिससे सिस्टम के बंद होने के बाद भी डेटा को कोई नुकसान नहीं होता है। यह एक Non-volatile स्टोरेज डिवाइस होता है जो की डेटा को हमेशा के लिए store रखता है।
SSD disk drive बहुत जल्दी ऑपरेट करती हैं यह Data को HDD की तुलना में बहुत तेज गति से पढ़ती हैं। इसलिए इसका वजन कम और यह बिजली भी बहुत कम खर्च करती हैं।
यह SSD चार प्रकार की होती हैं:
1) SATA SSD:
यह लैपटॉप Hard Drive की तरह होती है जो सिंपल SATA कनेक्टर को सपोर्ट करती है बिलकुल वैसे ही जैसे की Hard Disk। सबसे पहले यही SSD बाज़ार में आयी थी।
2) mSATA SSD:
mSATA यानी micro SATA SSD नार्मल SATA SSD से कनेक्टिविटी और फॉर्म फैक्टर दोनों में अलग होती हैं यह नार्मल SSD से साइज़ में काफी छोटी और दिखने में काफी अलग होती है यह एक तरह से सामान्य RAM स्टिक की तरह दिखाई देती है और इसके उपयोग की बात करें तो इसे हर कंप्यूटर में इस्तेमाल नहीं की जा सकती इसका उपयोग करने के लिए आपके PC mSATA पोर्ट का होना बहुत जरूरी है इस तरह की SSDs लैपटॉप में इस्तेमाल की जाती है।
3) M.2 SSD:
इस तरह की SSDs दिखने में तो mSATA की तरह ही होती हैं लेकिन यह इसका अपडेटेड है जो mSATA से फ़ास्ट तो है ही लेकिन छोटी होने के बावजूद भी यह दोनों तरह की कनेक्टिविटी को सपोर्ट करती है यानी इसे आप नार्मल SATA केबल से भी कनेक्ट कर सकते हैं।
4) SSHD:
SSHD को पूरी तरह से SSD नहीं कहा जा सकता क्यूंकि यह Solid State Drive और हार्डडिस्क दोनों को मिलाकर बनाई जाती है इसमें कुछ मेमोरी SSD की होती है और कुछ हार्डडिस्क की यानी यह HDD और SSD दोनों के बीच की चीज़ होती है इसे आजकल के लैपटॉप में इस्तेमाल किया जाता है।
इसका उपयोग IBM ने सन 1956 में किया था। इसमें डेटा को पढ़ने और लिखने के लिए प्लाटर और हेड लगे होते है प्लाटर एक मैग्निटिक कोटेड एक गोल डिस्क हैं जो चक्कर लगाती रहती है और जितनी गति से ये स्पिनिंग प्लाटर (Spinning Platter) चक्कर लगाते हैं उतनी ही जल्दी डेटा को पढ़ा और लिखा जाता हैं यह प्लाटर 5400 से 7200 रोटेशन प्रति मिनट से घूमता हैं।
यह बहुत ज्यादा बिजली का उपयोग करती है। इसका आकार और वज़न भी ज्यादा होता है। यह बहुत ज्यादा गर्मी और कम्पन पैदा करती हैं। इसमें डेटा के खो जाने का खतरा ज्यादा होता है।
आइये इनके बारे में जानते हैं :-
SSD
SSD = Solid-State Driveइसमें स्टोरेज के लिए माइक्रोचिप लगे होते हैं। जिसके कारण यह ज्यादा समय तक चलती है। इसमें मूविंग पार्ट्स नहीं होते है जिससे कम्पन नहीं होता हैं। इसमें डेटा को पढ़ने और लिखने के लिए एक Embedded Processor होता है जिसे कंट्रोलर कहा जाता है। SSD में NAND-based फ़्लैश मैमोरी का उपयोग होता है जिससे सिस्टम के बंद होने के बाद भी डेटा को कोई नुकसान नहीं होता है। यह एक Non-volatile स्टोरेज डिवाइस होता है जो की डेटा को हमेशा के लिए store रखता है।
SSD disk drive बहुत जल्दी ऑपरेट करती हैं यह Data को HDD की तुलना में बहुत तेज गति से पढ़ती हैं। इसलिए इसका वजन कम और यह बिजली भी बहुत कम खर्च करती हैं।
यह SSD चार प्रकार की होती हैं:
1) SATA SSD:
यह लैपटॉप Hard Drive की तरह होती है जो सिंपल SATA कनेक्टर को सपोर्ट करती है बिलकुल वैसे ही जैसे की Hard Disk। सबसे पहले यही SSD बाज़ार में आयी थी।
2) mSATA SSD:
mSATA यानी micro SATA SSD नार्मल SATA SSD से कनेक्टिविटी और फॉर्म फैक्टर दोनों में अलग होती हैं यह नार्मल SSD से साइज़ में काफी छोटी और दिखने में काफी अलग होती है यह एक तरह से सामान्य RAM स्टिक की तरह दिखाई देती है और इसके उपयोग की बात करें तो इसे हर कंप्यूटर में इस्तेमाल नहीं की जा सकती इसका उपयोग करने के लिए आपके PC mSATA पोर्ट का होना बहुत जरूरी है इस तरह की SSDs लैपटॉप में इस्तेमाल की जाती है।3) M.2 SSD:
इस तरह की SSDs दिखने में तो mSATA की तरह ही होती हैं लेकिन यह इसका अपडेटेड है जो mSATA से फ़ास्ट तो है ही लेकिन छोटी होने के बावजूद भी यह दोनों तरह की कनेक्टिविटी को सपोर्ट करती है यानी इसे आप नार्मल SATA केबल से भी कनेक्ट कर सकते हैं।4) SSHD:
HDD
HDD = Hard Disk Drive
इसका उपयोग IBM ने सन 1956 में किया था। इसमें डेटा को पढ़ने और लिखने के लिए प्लाटर और हेड लगे होते है प्लाटर एक मैग्निटिक कोटेड एक गोल डिस्क हैं जो चक्कर लगाती रहती है और जितनी गति से ये स्पिनिंग प्लाटर (Spinning Platter) चक्कर लगाते हैं उतनी ही जल्दी डेटा को पढ़ा और लिखा जाता हैं यह प्लाटर 5400 से 7200 रोटेशन प्रति मिनट से घूमता हैं।यह बहुत ज्यादा बिजली का उपयोग करती है। इसका आकार और वज़न भी ज्यादा होता है। यह बहुत ज्यादा गर्मी और कम्पन पैदा करती हैं। इसमें डेटा के खो जाने का खतरा ज्यादा होता है।


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